स्कैम या ब्लूप्रिंट? भारत के अरबपतियों द्वारा पूंजी के ‘पलायन’ का चौंकाने वाला खुलासा
मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन की हालिया चेतावनी ने देश के सबसे बड़े आर्थिक सच की धज्जियां उड़ा दी हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5 सालों में कॉर्पोरेट कंपनियों का मुनाफा सालाना 31% की रफ्तार से बढ़ा है, लेकिन जब बात देश के अंदर निवेश करने और रोजगार पैदा करने की आती है, तो ये ‘कुबेर’ अपनी मुट्ठी बंद कर लेते हैं।
पैटर्न साफ है: मुनाफा भारत का, लेकिन तिजोरियां विदेश में !
क्या चल रहा है परदे के पीछे ?
सरकारी मेहरबानी, कॉर्पोरेट की मनमानी: पिछले 10 सालों में सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स में भारी कटौती की ताकि कंपनियां निवेश बढ़ाएं। लेकिन हुआ क्या? अमीरों ने इस पैसे से अपनी निजी संपत्ति बढ़ाई और देश में ‘रियल एसेट्स’ लगाने के बजाय हाथ पीछे खींच लिए।
पूंजी का पलायन: CEA खुद मान रहे हैं कि भारतीय उद्योगपति पैसा भारत में लगाने के बजाय विदेशों में ‘फैमिली ऑफिस’ सेटअप कर रहे हैं। यानी देश के संसाधनों से कमाया गया पैसा अब ग्लोबल लग्जरी में उड़ाया जा रहा है।
बढ़ती खाई: जब देश का मध्यम वर्ग और गरीब महंगाई से जूझ रहा है, तब शीर्ष 500 कंपनियों का बेतहाशा मुनाफा जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच रहा।
टॉप 3 ‘टाइकून’ और सरकार का ‘फेवर’
अडानी ग्रुपः इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर पोर्ट्स तक सरकार का पूरा समर्थन, लेकिन विस्तार का मॉडल विदेशी कर्ज और चुनिंदा संपत्तियों तक सीमित ।
रिलायंस इंडस्ट्रीज: डेटा और रिटेल नीतियों का सीधा फायदा मिला, संपत्ति में कई गुना इजाफा हुआ, मगर निवेश का बड़ा हिस्सा अब उनके अपने इकोसिस्टम में ही घूमता है।
IT दिग्गजः नकद का भंडार होने के बावजूद ये कंपनियां नए निवेश के लिए ‘अनिश्चितता’ का बहाना बनाती हैं, जबकि मुनाफा महामारी के दौरान भी नहीं रुका।
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यह कितना खतरनाक है?
यह एक ‘इकोनॉमिक टाइम बम’ है। अगर मुनाफा सिर्फ अमीरों की तिजोरियों में बंद होगा और निवेश नहीं बढ़ेगा, तोः
बेरोजगारी कभी कम नहीं होगी।
रुपया गिरता रहेगा क्योंकि पैसा बाहर भाग रहा है।
असमानता गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा कर सकती है।
सरकार की नीतियां क्या सिर्फ चंद घरानों को मोटा करने के लिए हैं? जब ऑपरेटिंग माहौल मुनाफे के लिए सही है, तो निवेश के लिए ‘मुश्किल’ क्यों बताया जा रहा है?
वक्त आ गया है कि हम अपनी अर्थव्यवस्था की इस ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ वाली परत को उखाड़ें।
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